Thursday, 4 May 2017

पूरी फसल को काट देती है











मेरी लिखी हर कविता
एक हंसिया है,
हर शाम तन्हाई
के खेत में
उपज आई लहलहाती
फसल को काट देती है
हर सुबह...
फिर से फसल बोता हु
ताकि लहलहा सके
ये खेत ताकि तुम
आकर देखो अपने
प्यार की खेती कितनी
सिद्दत से उगाई है मैंने
पर फिर जब तुम नहीं आती
और मुझे तन्हाई घेरती है
तो ये हंसिया पूरी
फसल को काट देती है

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