Thursday, 4 May 2017

तुम मेरे घर आना










देखा है तुमने कभी
मार्च की गर्म
हवाओं का गुलदस्ता,
भरी है कभी
पिचकारी में
मेरी साँसों की नमी...
कहो तो इस नमी में
भिगो के लिए आऊं
तुम्हारे लिए कई
सारे छोटे-छोटे चाँद....
और तुम उन्हें लगा कर
देखना अपने आंचल में
सितारों से जड़ी इस आँचल
को ओढ़ आना तुम मेरे घर

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