Thursday, 15 June 2017

हल्की-हल्की बुँदे

हल्की-हल्की बुँदे...
मुझे तुम्हारे स्पर्श
का एहसास
दिलाती है....
कभी मेरे पलकों
पर ठहरती है...
कभी मेरे होटों पर
मुस्कराती है...
तुम छायी हो 
मेरे समस्त अस्तित्व 
के आकाश पर 
इसकदर की मुझे 
हर शे में सिर्फ और सिर्फ
तुम नजर आती हो     

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