Friday, 23 June 2017

तुम मेरे पास आना 

बारिश की इन 
बूंदों के साथ,
हम-तुम खेले है...
इन बूंदों के लिये ही,
मिले और बिछड़े है...
तुम्हारी जिद इन 
बूंदों को पकड़ लेने की,
मेरी जिद इन बूंदों में 
साथ तुम्हारे भीग जाने की...
ख्वाइशें फिर चाहे अलग हो,
बारिश की बूंदों के साथ,
खेलने की चाह इक थी....
ठीक वैसे ही जैसे 
तुम मेरे पास आना 
चाहती हो पर किसी का
दिल दुखाये बगैर और
मैंने ठान रखा है नहीं 
जीना तेरे बगैर चाहे 
ख़ुदा को करना पड़े नाराज़

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