ये सच है
कि प्रेम पहले
ह्रदय को छूता है
मगर ये भी उतना
ही सच है कि प्रगाढ़
वो देह को पाकर होता है !
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उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...
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