Friday, 7 July 2017

मेरी ज़िन्दगी बन गए हो तुम 

जो सवाल 
हरदम तुम 
मुझसे करते हो 
कभी खुद 
भी तलाशो उसका जवाब
किन्यु तुम्हे परेशान 
कर जाती है  
थोड़ी देर की दुरी 
किन्यु नहीं रह पाते
दो पल के लिए 
मुझसे दूर तुम 
हर लम्हा
हर वक़्त 
सिर्फ मेरा साथ
सिर्फ मेरी खुसी 
आखीर किन्यु ?
जब तलाश लो 
इनकी वजह तो 
मुझे भी बताना तुम 
मैं भी पता करुँगी 
किन्यु बन गए हो तुम 
तुम मेरी खुसी 
कब बन गए तुम 
मेरी ज़िन्दगी

No comments:

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...