Thursday, 17 August 2017

रात कभी पूर्ण नहीं होती

रात हमेशा 
होती है अधूरी 
कभी होती है वो 
अँधेरी तो कभी 
होती है वो उजली 
पर वो होती है 
हमेशा अधूरी 
रात कभी पूर्ण
नहीं होती वो होती 
है सदैव किसी के 
इंतज़ार में उंघती 
और जब वो आता 
है कभी उसके पास
तो रात हो जाती है 
छोटी किन्यु की रात 
कभी पूर्ण नहीं होती 

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