Saturday, 29 April 2017

गुलाबी गालों की रंगत









आओ मेरे साथ
तुम्हें लेकर चलता हूं मैं
सपनों से भी आगे
एक बिलकुल नई दुनिया में
जहां तेरा प्यार फैला है
आसमां की तरह
हवाओं की जगह फैली है
तेरे जिस्म की
भीनी-भीनी सी खुश्बू
आओ मेरे साथ मैं
तुम्हें लेकर चलता हूं
मैं सपनों से भी आगे
एक बिलकुल नई दुनिया में
जहां बादलों की जगह
लहरा रही है तेरी जुल्फें
तेरी आंखों जैसी गहराई है
समन्दर के फूलों में
चटख रही है तेरे सुर्ख
गुलाबी गालों की रंगत

No comments:

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...