Sunday, 19 January 2020

यादें तेरी !


यादें तेरी !

यादें तेरी अश्रुविहल है 
कितनी असहाय कर 
जाती है ! 
मेरी इन आँखों में कितनी 
ही बारिशों का घर बना 
जाती है !
गूंज गूंज कर ये मौन
तुझ को पुकारने लग 
जाता है ! 
व्यथित हो कर सन्नाटें 
भी मेरे सुर में सुर मिलाने 
लग जाते है !
प्रतीक्षा के क्षण भी अधैर्य 
होकर टूटती उखड़ती 
सांसों से भी !
दुआओं में तेरे ही नाम 
की रट लगाने लग 
जाते है !

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