Tuesday, 17 July 2018

शोहरत नवाज़ने आ जाओ







शोहरत नवाज़ने आ जाओ 

➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

अच्छा बताओ मेरे 

चीर प्रतीक्षित इश्क़ को 
अपनी रूह में पनाह देने 
ही तो आयी हो ना तुम;
अच्छा बताओ मेरे
जीवन की तमाम अमावस 
वाली रात को पूनम करने 
ही तो आयी हो ना तुम;
मेरे विश्वास को अपने
समर्पण से ईश करने 
ही तो आयी हो ना तुम;
मेरे नाम का सिन्दूर 
अपनी सुनी मांग में सजा कर मेरी बेनाम 
सी हैसियत को शोहरत 
से नवाज़ने की ख्वाहिश 
ही तो लेकर आयी हो ना तुम;
बोलो ना तुम मेरे ही 
चीर प्रतीक्षित इश्क़ को 
अपनी रूह में पनाह देने 
ही तो आयी हो ना !!

No comments:

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...