Wednesday, 18 April 2018

मेरी हार की वजह




मेरी हार की वजह
--------------------
जब भी तुम
मुझे मिलती हो
कहीं खोई-खोई सी
रहती हो
जैसे बूँदें
गिरती हैं
पत्तों पर
और फिसल
जाती हैं ठीक
वैसे ही मेरी
कही हर बात
तुम तक पहुंच कर
लौट आती है
मुझ तक और
मैं जीत के भी हार
जाता हूँ फिर एक बार
दर्द हारने का नहीं
है मुझे दर्द है
"वजह" का
तुम कैसे वजह
बन सकती हो
मेरी हार का

No comments:

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...