Thursday, 23 November 2017

मेरे शब्द तुम्हे...तलाशते है ..

तलाशते रहते है ..
मेरे शब्द तुम्हे...
तुम जो नही 
आस पास मेरे 
कुछ लिखते ही 
नही ये सब्द मेरे ...
मेरे शब्द पिरोते है ,
सिर्फ एक तुम्हे....
ये तो लिखते है ..
तुम्हारे चेहेरे की 
उदासियाँ और तुम्हारी 
आखों की गहराइयाँ...
कि तुम नही हो तो,
शब्द पहचानते नही 
मेरी भी परछाईयाँ....
कि इन शब्दों को..
तुम्हारी खामोशियों को...
समझने का हुनर है ..
जिसे तुम लब्ज़ 
नही दे पाती हो , 
वो शब्द बन कर...
कागज पर उतरते है ...
ये शब्द ही तो है..
जो तुम्हे लिख कर..
मेरे दिल में उतरते जाते है...
तलाशते है फिर..
मेरे शब्द तुम्हे...!!!

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