एक मेरी मज़िल हो तुम चाहे हासिल हो मुझे तेरा सामीप्य डूबकर या हो जाए रस्ते सारे बंद मेरी वापसी के पर तुझमे हर एक बात है मेरी ज़िन्दगी को छूती हुई और चाहता हु मैं पहुंचना अब मेरी मंज़िल पर चाहे धार हो पानी की उलटी दिशा में बहती हुई पर अब ना रोक पाएगी मुझे तुझ तक पहुंचने से
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