Wednesday, 4 September 2019

मैं वचन देता हूँ तुम्हे !


मैं वचन देता हूँ तुम्हे !

गर तुम करो वादा मुझसे 
मुझ सा ही प्रेम करने का
मैं वचन देता हूँ तुम्हे इस 
धुप और छाया की आंख 
मिचौनी को एक दूजे में 
घोलने की ! 
गर तुम करो वादा मुझसे 
मेरी तन्हाई को आबाद 
करने की तो मैं वचन देता हूँ  
तुम्हे तुम्हारे घर के आंगन में 
साथ साथ खेलेंगे ख्वाहिश 
और ख्वाब !
गर तुम करो वादा मुझसे 
मेरा दिल कभी ना दुखाने 
का तो मैं वचन देता हूँ तुम्हे 
वो जहां देने की जंहा दर्द
और हंसी एक दूजे पर मरते हो !
गर तुम करो वादा मुझसे 
मेरा प्रेम अमर कर देने का 
मैं वचन देता हूँ तुम्हे ले चलूँगा 
तुम्हे तुम्हारा हाथ थाम कर 
वंहा जंहा अपने और पराये 
एक साथ मिलकर एक दूजे 
का त्यौहार मनाते हों ।

No comments:

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...