Saturday, 9 September 2017

मैंने वास्तविकता खो दी

शायद तुमने मुझे
अपने सपनो में 
इतना देख लिया 
की मैंने अपनी
वास्तविकता ही खो दी 
तुम्हारी नज़र में 
किन्यु की सपनो में 
मैं शायद तुम्हारी
मज़बूरियों को समझता हु 
तभी तो तुम्हारे 
पास समय ही 
नहीं बचा इस सजीव'
देह को छूने का 
चूमने का इन मेरे 
होंठो से निकलती 
आहों को जो तुम्हे
इतनी प्यारी थी ?

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