Sunday, 30 June 2019

मेरा प्रेम !


मेरा प्रेम !

नितांत अकेलेपन की 
जंजीरों में जकड़ा मेरा 
जो अस्तित्व है 
तुमसे बंधकर ही सबसे 
मुक्त होने की आस पर 
जीता है  
मेरा हर लम्हा हर घडी 
तुम्हारा इंतज़ार करता है 
एक सिर्फ तुम्हारा और
चाहता है की तुम समझो 
मेरे दिल की हर एक ऊपर 
नीचे होती धड़कन को 
और इसके अश्रु के ताप को 
और मेरे कलेजे में रुकी 
उन सिसकिंयों की घुटन को 
मेरी नज़रो के सहमेपन को
और आपस में लड़ती मेरी 
अँगुलियों के द्वंद को गर 
वक़्त मिले तुम्हे कभी तो 
इन सबका अर्थ समझना 
समझ आ जाएगा तुम्हे 
मेरा प्रेम !

Saturday, 29 June 2019

इश्क़ की ख़्वाहिशें !


इश्क़ की ख़्वाहिशें !

वो इश्क़ ही है 
जो अक्सर मुझ से 
हंसी ठिठोली करता है 
खुश रहा करो तुम 
मुझ से अक्सर ही 
वो कहता रहता है 
और कभी-कभी वो 
दिल दुखाने के लिए  
उल्टी-सीधी हरकतें
भी वो कर ही देता है 
वो कुछ अजब सा है 
अपने इश्क़ में वो 
शिद्द्तें भी भरता है 
वो मेरे दामन में 
आग भी लगाता है 
फिर खुद ही उसे 
बुझाने के खातिर 
बारिश भी करता है 
दिल में मेरे वो साथ 
जीने और मरने की 
ख़्वाहिशें भी जगाए 
रहता है !

Friday, 28 June 2019

बारिश की बुँदे !


बारिश की बुँदे !

बारिश की ये रिमझिम 
बुँदे मुझे तुम्हारे स्पर्श,
का एहसास दिलाती है !

वो कभी तुम्हारी ही 
तरह मेरी इन पलकों,
पर ठहर जाती है !

तो कभी रूककर मेरे 
होंठों पर बिलकुल 
तुम्हारी ही तरह, 
मुस्कराती है !

तुम छायी रहती हो 
मेरे अस्तित्व के आकाश, 
पर कुछ इस तरह !

कि मुझे हर शय में, 
सिर्फ और सिर्फ एक 
तुम नजर आती हो !

Thursday, 27 June 2019

एक सच !


एक सच !

तुमसे अच्छा मुझे 
तुम्हारा नाम लगता है 
जो हमेशा ही रहता है  
मेरे आस-पास ही  
महका-महका सा 
और जब धीमे से 
मैं गुनगुनाता हूँ 
तुम्हारा वो नाम
तो हवा में घुल कर
वो हवा को भी जैसे 
महका जाता है   
कभी-कभी वो नाम  
मुझे खिड़की से झांकती 
रेशमी-मुलायम सी 
सुबह के सूरज की
पहली किरण सा 
ही लगता है 
तो कभी मुझे 
वो सर्द रातों में 
गर्म लिहाफ सा 
लगता है वो तुम्हारा 
नाम मुझे कभी-कभी 
तुमसे भी अच्छा लगता है !

Wednesday, 26 June 2019

अकेला छोड़ जाती हो !


दरवाजा बंद कर दस्तक भी देती हो , 
फिर छुप कर आवाज़ भी लगाती हो ;
  
चुप रहने को कह कर मुझे तुम खुद ही ,   
टेढ़ी-टेढ़ी नज़रो से सवाल भी करती हो ;

रोज रोज मेरा साथ देने के नाम पर तुम , 
कुछ देर मुझसे मिलने भी चली आती हो ;

फिर तुम ही बताओ क्यों तुम बार-बार , 
मुझे ऐसी दोहरी दुविधा में डाल जाती हो ;

यूँ रोज कल आने का बोल कर तुम मुझे ; 
क्यों रोज यूँ अकेला छोड़ जाती हो !

Tuesday, 25 June 2019

ख़ामोशी !


ख़ामोशी को खामोश समझना , 
भूल ही होती है अक्सर ;

कितनी हलचल और अनगिनत 
ज्वार भाटे समाए होते है इसमें अक्सर ;

आँखों में समाई नमी जाने कितने 
समंदर छुपाये होती हैं अपने अंदर अक्सर ;

नहीं टूटते ऐसे मन के ज्वार -भाटे ,
जब तक कोई कंधे को छू कर ना आँखे अक्सर ;

कि मैं तुम्हारे साथ हूँ हर पल ;
हर परिस्थिति में समझे तुम !

Monday, 24 June 2019

भयहीन प्रेम !


भयहीन प्रेम !

प्रेम में होने से
भय कैसा ?
मानव जीवन
का सारा लेखा 
जोखा बाँच पता 
यही चलता है 
चिर काल से ही
प्रेम में उत्थान 
पाये अस्तित्व ही
जी पाये हैं
काल की सीमाओं को 
वो ही पार कर पाये हैं
इस अदभुत अनुभव
को जी पाने 
की संभावना
से मुँह क्यों मोड़ना ?

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...