Friday, 8 March 2019

मखमली स्मृतियाँ !

मखमली स्मृतियाँ !
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दौड़ती भागती सी इस 
मेरी ज़िन्दगी में ;

तेरे प्रेम की लहरों के 
सिक्त किनारों पर ही, 
कुछ पल ठहराव के मिलते है;

उन्ही पलों में सोचता हु,   
तुम्हारे प्रेम को सौपूँ कुछ हर्फ़, 
तब बर्षों से दबी मेरी प्यास को 
और पिपासित पाता हु ; 

तब कोलाहल मचाते मेरे 
भाव मांगते है, मुझसे कुछ 
हर्फ़ उधार ;
  
और जब मैं उनके लिए 
गढ़ता हूँ कुछ हर्फ़ तो 
मेरे भावों की बूंदें तेरी
प्रेम पिपासित धरा को 
भी भिंगो देती हैं;

और फिर मैं मेरी तन्हाइयों  
को तेरी मखमली तन की 
स्मृतिओं में लपेट कर 
सुला देता हु !

Thursday, 7 March 2019

वो कोई और नहीं इश्क़ है !

वो कोई और नहीं इश्क़ है !
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सलामती उसी की मांगता हैं इश्क़ , 
जिसने खुद उजाड़ा है उसको ;
तुम सिर्फ इतना बता दो मुझ को ,
क्या ये ठीक है कि इसी को कहता हु मैं इश्क़ ! 

सारी उम्र अपना कसूर ढूँढता रहा इश्क़ ;
और फिर ज़िदगी भर उसी कसूर वार ,
मोहब्बत को ढूँढता रहा वही नादान इश्क़ !

कोई तो है आज भी मेरे अंदर ,
जो मुझ को संभाले हुए अब तलक ; 
यही सोचता हुआ वो उसे पुकारता रहता है , 
रात और दिन और बेक़रार होकर भी ;
बरक़रार रखा हुआ है खुद को अब तलक  ;
तुम सिर्फ इतना बता दो मुझे वो इश्क़ है या नहीं !

लगता है भूल गयी है शायद मोहब्बत मुझे , 
या फ़िर कमाल का सब्र रखती है वो ;
लेकिन तुम ये तो बता दो मुझे ,
तेरा दिल धड़कता है अब तलक ;  
या वो भी पत्थर का रखती हो तुम !

Wednesday, 6 March 2019

जय हिन्द_2 !

जय हिन्द !
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देश की आज़ादी के सूरज को  
कभी छुपने नहीं देंगे हम;

वीर जवानों की शहादत को 
कभी जाया ना जाने देंगे हम;

जब-तक है इस तन में लहू, 
माँ भारती तेरे आंचल पर हम 
किसी ना-पाक के पैर नहीं पड़ने देंगे !   

Tuesday, 5 March 2019

जय हिन्द !

जय हिन्द !
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इकबाल-ए-मौत की आरज़ू ने उसे
इतना उत्साहित कर दिया कि, उस   
दिन से दुश्मनो की गिनती पर दिन 
और रात ग़ौर करने लगा ! 

इंतेक़ाम के लिए वो सीमा पर चल दिया ,
अपने हिस्से की जिम्मेदारी जब पूरी कर चुका; 
तब उसने कल की तारीख़ पर भी अपना नाम  
ख़ुशी-ख़ुशी से लिख दिया !

एक तारीख पर अपना सर दूसरी तारीख पर, 
अपना जिगर रख कर अपने मंसूबों को; उसने 
बड़े गर्व से जाहिर कर दिया !

उस की अपनी पसंद की तारीख चुनी थी,  
वादियों के कोने कोने से मिटा दिए; उसने 
सारे ना पार्कों के निशाँ थे !

वादियों में दूर तक चलती पुरवईयाँ हो,  
हर एक दिल में सकूँ के बादल उमड़े बस;  
यही उसका एक मात्र मंसूबा था !

इकबाल-ए-मौत की आरज़ू ने उसे इतना 
उत्साहित कर दिया था कि उस दिन वो 
चुन-चुन कर दुश्मनो का खात्मा करने 
की सौगंध खा कर गया था ! 

Monday, 4 March 2019

सुनो ओ वीरों !

सुनो ओ वीरों !
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राष्ट्र के जवानों , 
मेरे देश के वीरों 
देश की आन पर, 
तुम आँच ना आने देना;

जिन जबाज़ों ने 
अपने लहू से नहलाया,  
ये वतन का तिरंगा है;

उन वतन के लाड़लों 
के लहू को तुम कभी 
बेज़ार जाने मत देना;

मेरे देश के जवानों  
उनकी याद को, 
तुम अब भुलाने  
मत देना;

अब कभी तुम इस 
देश की आन -बान- 
और शान पर आँच 
आने ना  देना !

Sunday, 3 March 2019

जय हिन्द !

जय हिन्द !
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पराक्रम का ढोल बजता है,
जिसका सरेआम सारे जहां 
के आसमां में; 

वही वो देश है जिसके लोग, 
उसकी भूमि को जय-जय, 
भारत-भूमि कहते है;

और एक वो ना-पाक ढोंगी है,  
जिसका ढोल खुद-ब-खुद अपनी 
ही भूमि के पहलू में सिसकता है !

Friday, 1 March 2019

वीर जाबांज़ सपूतों !

वीर जाबांज़ सपूतों !
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भारत तेरे वीर जाबांज़, 
सपूतों ने अपने रक्त से, 
अपने ही अदम्य साहस, 
कि अमर गाथा लिखी है,

उठो ओ वीर जाबांज़ सपूतों, 
अब तुम्हे ही नए सुदृढ़ भारत, 
का निर्माण करना है;

ओ जांबाज़ जवानों उठो, 
तुम्हें बस उस इतिहास,  
को दोहराकर जीत का, 
विगुल बजाना है,

उठो ओ वीर जाबांज़ सपूतों, 
अब तुम्हे ही नए सुदृढ़ भारत, 
का निर्माण करना है;

ओ पावन धरा के तरुणों,  
जन-जन के जीवन में फिर, 
से नई स्फूर्ति नई जान नए  
प्राण भरना है;

उठो ओ वीर जाबांज़ सपूतों, 
अब तुम्हे ही नए सुदृढ़ भारत, 
का निर्माण करना है;

आओ वीर जाबांज़ सपूतों, 
अब तुम्हें भी अपने रक्त, 
से उसी अदम्य साहस से, 
फिर वही विजय गान गाना है !

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...