Saturday, 8 December 2018

मेरी हार की वजह!

मेरी हार की वजह!
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तुम जब भी मुझसे 
मिलती हो तो कहीं 
खोई-खोई सी ही तो 
रहती हो जैसे बूँदें
गिरती हैं पत्तों पर
पर फिसल कर मिल  
जाती है मिटटी में  
ठीक वैसे ही मेरी
कही हर बात तुम 
तक पहुंच कर लौट 
आती है वापस फिर 
मुझ तक और मैं 
जीत के भी हार ही 
जाता हूँ फिर एक बार
दर्द हारने का नहीं है 
मुझे दर्द है "वजह" का
तुम कैसे वजह बन 
सकती हो मेरी हार की!

Friday, 7 December 2018

तुम्हारा नाम "हम्म"!

तुम्हारा नाम "हम्म"!
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मेरे प्रेम ने तो उस 
पहले ही दिन मुझे 
विवश कर दिया था;

तुम्हे वो सब कह देने 
जिसे कहने में अक्सर 
एक प्रेमी को लग जाते है;

कई घंटे दिन महीनो और 
कई बार तो सालों भी पर   
मैं उस प्रेम की उफनती नदी   
में कुछ इस कदर बहा की;

उस पहले ही दिन मैं 
नहीं रह पाया तुम्हे ये 
कहे बगैर की मैं तुम्हे 
बेइंतेहा मोहब्बत करता हु;

तब सर से पांव तक विस्मृत 
तुम मुझे देखती ही रह गयी थी 
पर तुम्हारे दिल ने भी मेरे दिल 
की इस इल्तिज़ा को स्वीकार लिया था;

तभी तो तुम कुछ देर 
निरुत्तर सी नज़रें नीची 
कर सिर्फ इतना कह पायी थी "हम्म';

ठीक उसी पल मैंने 
तुम्हारा नाम "हम्म"
रख दिया था ! 

Thursday, 6 December 2018

रहेगा वही जो अदृश्य है!

रहेगा वही जो अदृश्य है!   
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कुछ लफ्ज़ है जो 
सने नहीं है मेरे 
मेरे ज़ज़्बात की 
स्याही में अभी;

कुछ भाव भी है जो   
अब तक गर्भ में भी 
आये नहीं है अभी;
   
कुछ सपने है जो 
पहुंचे नहीं है मेरी 
आँखों में अभी;
  
कुछ प्रेम कथाएँ 
भी है जिनकी नीव 
रखी नहीं गयी है अभी;

कुछ रंग भी है जो 
फूलों में भी डले 
नहीं है अभी; 

कुछ किरणें है जो  
सूरज की वो नहीं 
पहुँचीं धरती पर अभी;

कुछ नाम है जो 
दर्ज़ नहीं हुए है 
इतिहास में अभी;

पर सुनो ये भी 
संभव है की रह 
जाए यंहा सिर्फ 
वही जो अदृश्य है अभी !

Wednesday, 5 December 2018

कौन थी वो और कौन होगी वो !

 कौन थी वो और कौन होगी वो ! 
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इतिहास में वो पहली नारी 
कौन थी जिसने सबसे पहले 
प्रेम किया था ?
मैं नहीं जानता उसका नाम 
लेकिन जो भी थी वो थी तो 
मेरी माँ सी ही वो;
मेरी आस यह है की भविष्य 
में वो आखरी नारी कौन होगी,
जो सबसे अंत में किसी एक को
प्रेम करेगी;
मैं नहीं जानता उसका नाम 
लेकिन वो जो भी होगी वो 
होगी तो मेरी बेटी सी ही और 
मैं यही प्रेम मेरे वंशजों को 
                                                              देकर जाना चाहूंगा !                                                                  

Tuesday, 4 December 2018

देह की दहलीज़ !



देह की दहलीज़ !
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ऐसा तो नहीं कह सकता 
मैं... 
की किसी ने भी ना चाहा था 
मुझे...
तुमसे मिलने के पहले तलक 
हां...
इतना जरूर पुरे यकीन से 
कह... 
सकती हु की किसी को भी  
मैंने...
इस देह की दहलीज़ को लांघने 
नहीं...
दिया था और तुमसे अपने 
प्यार...  
का इकरार करने के बाद ना 
जाने...
क्यों खुद को रोक ही नहीं पायी
और...
तुम कब उस दहलीज़ को लाँघ 
अंदर... 
आ गए पता ही नहीं चला मुझे !

Monday, 3 December 2018

आप मरना शुरू कर देते है!

आप मरना शुरू कर देते है!
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आप तब जीना छोड़ रहे होते है;
जब आप नहीं करते कोई नयी यात्रा, 
या गढ़ते नहीं कोई नहीं कहानी, 
और सुनते नहीं अपनी आत्मा की आवाज़, 
या फिर करते नहीं बिना वजह किसी की तारीफ !

आप तब जीना छोड़ रहे होते है;
जब आप अक्सर ही ताक पर रखना, 
शुरू कर देते है अपना ही स्वाभिमान, 
नहीं लेते किसी और की मदद व फिर, 
करनी छोड़ देते है मदद दूसरों की भी !

आप तब जीना छोड़ रहे होते है;
जब आप बदलना छोड़ देते है,
अपनी हर एक गलत आदतों को ,
गुजरते है रोज उन्ही एक से रास्तों से, 
नहीं देखते उगते सूरज और शीतलता, 
बरसाते चाँद को और विश्वास करना 
छोड़ देते है, उन टूटते सितारों की कहानियों में ! 

आप तब जीना छोड़ रहे होते है;
जब पहनना छोड़ देते है अलग-अलग 
रंग के कपडे और बात नहीं करते 
अनजान और अज़नबियों से और  
जब आप नहीं बदलते अपनी उस 
ज़िन्दगी को जिस से आप अब तक 
नहीं हो पूरी तरह से संतुष्ट !

आप तब जीना छोड़ रहे होते है;
जब आप होते है परेशान अपने 
काम और उसके अब तक आये 
परिणामो से फिर भी ऊपरी मन 
से करते रहते है आप वही काम !

आप तब जीना छोड़ रहे होते है; 
जब आप नहीं छोड़ते किसी अनिश्चित
को एक निश्चित के लिए और जब आप 
करना छोड़ देते है पीछा अपने किसी अधूरे 
रहे स्वप्न का और जब आप नहीं देते इज़ाज़त 
किसी एक खास व समझदार इंसान की सलाह 
से खुद को दूर कर लेने की उस पल आप जीना छोड़ 
मरना शुरू कर देते है !
   

Sunday, 2 December 2018

इश्क़ है

कितना कुछ लिखा गया है इश्क़ के लिए, इश्क़ ये है इश्क़ वो इश्क़ -इश्क़ और इश्क़ और किसी भी लिखे को प्रमाणिकता के साथ हम नकार नहीं सकते, क्योंकि मुझे लगता है इश्क़ के लिए जितना कुछ आज तक लिखा गया है वो सब लिखने वालों ने अपने अनुभवों के आधार पर लिखा है और आधार कभी भी गलत नहीं हो सकता पर मेरा मानना है की इश्क़ पर जितना कुछ लिखा गया है वो सब सच है पर कम है और हमें इसके लगातार जारी रखना चाहिए !
उसी क्रम में आज मैं अपने अनुभव को हु-ब-हु लिखने का प्रयास कर रहा हु !
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जाबित-कठोर 
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इश्क़ है;
जागते-जागते खोये रहना और;
सोते-सोते जागते रहना !

और मोहब्बत है;
सोते हुए की नींदों में भी;
अपनी मौजूदगी दर्ज़ करवाकर उसे होश में ला देना !
  
इश्क़ है;
सब-कुछ अपना होकर भी;
उन सभी पर अपना अधिकार खो देना!

और मोहब्बत है;
सब -कुछ पराया होने के बाद भी;
उसे अपना बनाकर उसी पराये का विस्तार करते रहना !

इश्क़ है;
जिसने हर बार तुम्हारे भरोशे को तोडा हो;
उसी की आँखों में एक अश्क़ की बून्द देखकर,
उसी पर एक बार फिर से वही भरोषा करना !

और मोहब्बत है;
उसी टूटे हुए भरोषे को फिर से;
एक अच्छे जुलाहे की तरह बुनना जिसे देख कर 
गांठ लगी होने का अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सके !

इश्क़ है;
बंद आँखों से अपनी प्रियतमा से ठीक वैसे ही बात करना;
जैसे वो अभी-अभी उसके सामने आकर बैठी हो !

और मोहब्बत है;
दूर बैठे अपने आशिक़ को ये एहसास भी ना होने देना;
की विरह की उसी वेदना में वो भी जल रही है !

इश्क़ है;
सिलवटों से भरे बिस्तरों में,
अपनी प्रेयषी की खुशबू  को ढूँढना !

मोहब्बत है;
उन्ही सिलवटों में अपने जिस्म 
की बेकरारियाँ छोड़ जाना !

इश्क़ है;
पल-पल टूटकर;
टूटे हुए खुद को खुद-ब-खुद जोड़ना !

मोहब्बत है;
टूट-टूट कर जुड़े उस स्थूल को अपने स्पर्श से;
जाबित कर उसी से शीला भेदन करवा लेना !      

इश्क़ है;
खुद को पल-पल नरक में झोंक कर 
आने वाले पल में स्वर्ग की कामना रखना !

मोहब्बत है;
स्वर्ग और नरक की परिभाषा को ताक  पर रख कर 
मरते दम तक चाहते रहने की प्यास जगा देना !

इश्क़ है;
दो और दो चार आँखों से 
देखा गया सिर्फ एक सपना !

मोहब्बत है;
उस एक अजनबी के सपने को साकार 
करने के लिए दुनिया की सारी दहलीज़ों को लाँघ आना !

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...