Friday, 2 June 2017

प्रेम पनपाता है


नफरत और कड़वाहट से 
भर जायेगी ये दुनिया
अगर दुनिया से मिट जाए
एक नाम इश्क़ का
चाहे वो मेरा इश्क़ हो
चाहे वो तेरा इश्क़ हो
प्रेम पनपाता है हमेशा
एक बीज और बीज जो
पनपते ही रंग दे दुनिया को
वो खूबसूरत प्रार्थना इश्क़
इसलिए इश्क़ करो
चाहे तो मुझसे करो
या चाहे तो मैं तुमसे करू 

दिल का दर्द

अक्सर एक प्यार करने वाला
अपने प्यार से यही कहता है
कि तुम्हारे लबों पर हंसी
ही देखना चाहता हु मैं
और प्यार करने वाली के
लब तो मुस्कुराने लगते है
लेकिन वो अपने नयन को
कैसे समझाए जो उसके
दूर जाते ही छलक आते है
क्या प्यार करने वाले को
ये नहीं पता होता की कहना
तो दिमाग मानता है दिल नहीं
दिमाग से कह कर चला जाता है
और दिमाग का कहा मानकर
लब मुस्कुराने लगते है
पर दिल का दर्द आँखों से
अक्सर ही छलक आता है 

तुम पुकारती हो मुझे

हा तुम जब जब भी 
पुकारती हो मुझे
मैं मौन नहीं रह पाया कभी
पर मेरे पुकारने पर तुम
मौन ही रहती हो अक्सर ?
तुम्हारा मौन रहना मुझे 

अखरता ही गया
पर तुमसे ज्यादा तो
तुम्हारा मौन ही मुखर
हो कर बोलता रहा
और मैं सुनता रहा अपनी
पलकें नम करके
और फिर तुम्हारे जाने
के बाद अक्सर ही
खुद को तुम्हारे मौन
और तुम्हारे एहसास से
ही घिरा पाता हु मैं

Thursday, 1 June 2017

मुझे अच्छा सा लगता है


मुझे अच्छा सा लगता है 
तुम्ही को देखते रहने
तुम्ही को चाहते रहना 
तुम्ही को सोचते रहना
तुम्ही को सुनते रहना 
खुद अपने दिल की
धड़कनो से तेरे नाम
को सुनते रहना है
मुझे अच्छा लगता है
हां तुम्हे यु बेइंतेहा
चाहते रहना मुझे बहुत
बहुत अच्छा लगता है
तुम्हे यु पागलो की तरह 
देखते रहना  

सावन की दस्तक


देखो सावन की 
दस्तक दे रही है
एक बार फिर ये हवाएं
कंही बिजली है
चमक रही और
कंही बादल है
कड़क रहे ऐसे में
मुझे बस एक तुम
याद आ रही हो
अभी तुम कंहा
और मैं हु कंहा
तन्हाईयाँ आग
लगा रही है
अब भी देखु मैं
ये मौसम या देखु
अब भी तेरी मज़बूरियां 

"खास"कौन होता है ?


अच्छा बताओ तो 
तुम मुझे "खास"
कौन होता है ?
मोहोब्बत,प्यार,
चाहत या प्यास ?
नहीं इनमे से कोई नहीं
खास वो होता है
जो खुद तो आम हो
लेकिन तुम्हे अपने
किरदार से और अपने
ज़ज़्बात से दुनिया की
सबसे "खास"जरुरत बना
ले अपने जीने के लिए
और जिए तो तुम्हारे लिए
और मरे तो तुम्हारे लिए

तुम्हारे बिना जीना


तुम्हे हसाना भी आता है 
तुम्हे रुलाना भी आता है
जब तुमसे रुठु तो
तुम्हे मनाना भी आता है
मेरी तो आदत है बक-बक
करते रहने की पर अगर
ये तुम्हे पसंद ना हो तो
मुझे चुप होना भी आता है
चाहे जितना तुम रुला लो मुझे
मुझे फिर भी अपना प्यार
निभाना आता है तुम्हारे लिए
हँसाना तो चुपके चुपके
रोना भी आता है पर इतना
जरूर याद रखना तुम
तुम्हारे बिना जीना
अब भी आता नहीं मुझको
और ये सिखने के पहले
मर जाना आता है मुझको 

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...