Friday, 14 February 2020

हैप्पी वैलेंटाइन डे !


हैप्पी वैलेंटाइन डे !

आज मैं तुम से ये कहता हूँ  
तुम अपने राम की श्री बनो
तुम मेरे प्रेम की पर्याय बनो 
तुम मेरी आयु की रेखा बनो 
आज मैं तुम से ये कहता हूँ
तुम मेरे सांसो की सुगंध बनो  
तुम मेरी छवि की कान्ति बनो 
तुम मेरे जीवन का अर्थ बनो 
तुम मेरे भावो की अभिव्यक्ति बनो 
तुम मेरे अस्तित्व की रक्षिणी बनो 
आज मैं तुम से ये कहता हूँ
तुम मेरे काव्य की मधुर ध्वनि बनो 
तुम मेरे स्वप्नों की मल्लिका बनो
तुम मेरे अक्षरों की सियाही बनो 
तुम मेरे हृदय की अभिलाषा बनो
आज मैं तुम से ये कहता हूँ
तुम मेरे जीवन की विभूति बनो 
तुम मेरे पौरुष का ओज बनो 
तुम मेरे ओष्ठ की अबूझ प्यास बनो  
तुम मेरे अजिरा की तुलसी बनो
आज मैं तुम से ये कहता हूँ
तुम मेरे नैनों की ज्योत्स्ना बनो 
तुम मेरी अर्जित अकूत सम्पदा बनो 
तुम अपने राम की श्री बनो !

Thursday, 13 February 2020

स्निग्ध स्पर्श !

Happy Kiss Day 

स्निग्ध स्पर्श !

ज़िन्दगी को इतने करीब से पहले 
कभी महसूस नहीं किया था मैंने
जब तुम्हारे होठों के स्निग्ध स्पर्श 
को पाया तो जाना मेरे भाग्य में 
लिखी सबसे बड़ी उपलब्धि हो तुम 
जब तुम्हारे होठों के स्निग्ध स्पर्श 
को पाया तो जाना कैसे कोमलता 
कठोरता को एक पल में तरल कर देती है 
जब तुम्हारे होठों के स्निग्ध स्पर्श 
को पाया तो जाना कैसे कोई शब्द 
इन होंठो से लगकर सुरीली धुन बन जाते है 
जब तुम्हारे होठों के स्निग्ध स्पर्श 
को पाया तो जाना इन्ही होठों से 
निकली पुकार प्रार्थना बन रिझा 
सकती है किसी भी रुष्ट देव को  
जब तुम्हारे होठों के स्निग्ध स्पर्श 
को पाया तो जाना मरने वाला कोई   
ज़िन्दगी को चाहता है कैसे ! 

Wednesday, 12 February 2020

बाँहों के घेरे में !


बाँहों के घेरे में !

मेरी चाहत है...
तुम्हारी बाँहों की गोलाइयों में  
समाये हुए ज़िन्दगी के दिए तमाम 
दर्दो से निज़ाद पाने की !
मेरी चाहत है...
मौत की घनी ख़ामोशी को भी 
तुम पर लिखी दो चार प्रेम 
कविता सुनाने की ! 
मेरी चाहत है...
तुम्हारी इन्ही बाहों में रहकर  
एक बार फिर से उस छोटे से 
प्रखर को जीने की !
मेरी चाहत है...
तुम्हे उस माँ के सामने गले 
लगाने की जिनके लिए तुम 
आज तक नहीं निभा पायी हो 
अपने वो वादे जो तुमने किये थे 
मुझसे प्रेम कर के ! 
मेरी चाहत है...
बस चाहत है और चाहत पूरी हो 
ये भी तो जरुरी नहीं ना क्योंकि 
ये बस मेरी चाहत है ! 

Tuesday, 11 February 2020

एक वादा करो !

एक वादा करो !

तुम..आज एक वादा करो मुझसे..
कि तुम यु ही अपनी आँखों कि गहराई में 
मेरी पूरी कायनात समाये रखोगी सदा !
तुम..आज एक वादा करो मुझसे..
कि जब कभी मैं अकेला बैठा मिलूं तुम्हे 
तो तुम चुपचाप पीठ पीछे आकर मेरी 
आँखें बंद कर पूछोगी की बोलो कौन हूँ मैं सदा ! 
तुम..आज एक वादा करो मुझसे..
कि तुम यु ही अपनी गोलाकार बाँहों के घेरे में 
मेरी तनहाईयों को गुम करती रहोगी सदा !
तुम..आज एक वादा करो मुझसे..
कि उम्र के उस पड़ाव में भी तुम यु ही मेरी 
ऊर्जा बनकर बहोगी मेरी रक्त कोशिकाओं में
जिस उम्र में अक्सर जीवन नीरस सा लगता है ! 
तुम..आज एक वादा करो मुझसे..
कि यु ही मेरा सारा दुःख दर्द और गुस्सा 
कंही खोता रहेगा पाकर के साथ तुम्हारा सदा !
तुम..आज एक वादा करो मुझसे..
कि तुम थाम कर मेरा हाथ अपने हाथों में 
सदा रहोगी आकर थोड़ा और करीब मेरे सदा !

Monday, 10 February 2020

तुम्हारा टेडी बियर !


तुम्हारा टेडी बियर ! 

हां मैं रहूँगा तुम्हारे पास 
सदा बनकर तुम्हारे 
टेडी बियर सा !
बन तेरे हर एक सुख-दुःख 
का साथी सा जो दूर करे तेरी 
हर एक उदासी को !  
तेरे इस तंहा से जीवन में 
वो रंग भरे हर एक 
ऋतुओं का !
संग तेरे मैं ही चलूँ साथ 
तेरे ही हर पल रहु तेरे मन 
की सारी बातें चुपचाप 
मैं ही सुनूं ! 
सुबह जब तुम ऑंखें खोलो
तुम्हे बस एक मैं ही तुम्हारे 
सामने मिलूं !
रात को जब तुम सोने जाओ 
बाहों में अपनी मुझे ही भर कर 
तुम सो जाओ !
तेरी सारी खुशियाँ मैं ही बन 
कर एक तेरे ही संग मैं 
सदा-सदा रहूं !
हां एक मैं ही रहूं तुम्हारे पास 
सदा बनकर तुम्हारे 
टेडी बियर सा !

Sunday, 9 February 2020

इज़हार !


इज़हार !

मैंने सुना है बोलते अक्सर  
तुम्हारी इन दोनों आँखों को ;
तब भी जब तुम नहीं थी , 
मेरे सामने बस मैं था और थी 
ये दो बोलती तुम्हारी आँखें ;
उन दोनों ने ही तो किया था 
सबसे पहले इकरार मेरे प्रेम का 
वो भी तुमसे बिना ही पूछे ;
और मैंने मान लिया था , 
उसके इकरार को ही प्यार ;
पर मुझे कहाँ पता था कि 
तुम करोगी मुझे प्यार यूँ 
बर्षों इतना परखने के बाद ;
जबकि तुम्हारी इन दोनों 
आखों में मेरी रूह आज भी 
ठीक वैसे ही मचलती है ;
जैसे वो मचली थी उस पहले 
दिन जब तुम नहीं थी सामने 
मेरे बस मैं था और थी वो दोनों  
बोलती तुम्हारी आँखें ;  
और हाँ मुझे पता है हर एक 
रूह की किस्मत में कहा लिखा 
होता है यूँ ही किसी ना किसी 
कि आँखों में मचलना !

"चॉकलेट डे"


"चॉकलेट डे"

चली आओ तुम की तुम्हे 
तुम्हारे लिए ला कर रखी  
वो डेरी मिल्क बुला रही है !
सुनो तुम उसी डेरी मिल्क 
कि तरह मुँह में रखते ही  
घुलने वाली हो नाम लेते ही 
दिल को पिघलाने वाली हो 
गले से उतरते ही शरीर के 
पुरे रक्त को मीठा कर 
देने वाली हो !
और सुनो तुम मुझे ठीक 
उतनी ही प्रिय हो जितनी 
तुम्हे प्रिय है वो डेरी मिल्क ! 
सुनो आज चॉकलेट डे है 
चली आओ तुम की तुम्हे 
तुम्हारे लिए ला कर रखी  
वो डेरी मिल्क बुला रही है !

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...