Sunday, 9 February 2020

"चॉकलेट डे"


"चॉकलेट डे"

चली आओ तुम की तुम्हे 
तुम्हारे लिए ला कर रखी  
वो डेरी मिल्क बुला रही है !
सुनो तुम उसी डेरी मिल्क 
कि तरह मुँह में रखते ही  
घुलने वाली हो नाम लेते ही 
दिल को पिघलाने वाली हो 
गले से उतरते ही शरीर के 
पुरे रक्त को मीठा कर 
देने वाली हो !
और सुनो तुम मुझे ठीक 
उतनी ही प्रिय हो जितनी 
तुम्हे प्रिय है वो डेरी मिल्क ! 
सुनो आज चॉकलेट डे है 
चली आओ तुम की तुम्हे 
तुम्हारे लिए ला कर रखी  
वो डेरी मिल्क बुला रही है !

Saturday, 8 February 2020

हैप्पी रोज़ डे !




हैप्पी रोज़ डे ! 

आज "रोज डे " है , 
तो मेरे दिल ने मुझ 
से बड़े ही अदब से 
फरमाइश की है ; 
क्यों ना आज फिर
से तुम्हें गुलाब की
तरह गुलाबी होते
देखा जाए ;
ठीक वैसे ही जैसे
पहली बार मेरी ही
अंगुलियों का स्पर्श
पाकर तुम्हारी देह
के सारे रोम रोम खड़े
हो गए थे ; 
और चेहरे से गुलाबी
आभा झरने लगी थी ,
तो चाहा आज फिर से
एक बार मेरे गुलाब की
गुलाबी को पा लू ; 
मैं अगर तुम्हारा गुलाब
हूँ तो तुम उस गुलाब की
गुलाबी आभा हो ; 
तो चलो इसी बहाने
इस "रोज डे " पर ,
अपनी गुलाबी आभा
अपने गुलाब पर झार
दो ना तुम !
   

Thursday, 6 February 2020

नामांकरण !


नामांकरण !

निष्प्राण ह्रदय की दहलीज़ 
पर अनुभूतियों के मानचित्र 
विद्रोह कर अपना अस्तित्व 
संजोने लगते है !
विवश होकर अभिव्यक्तियों 
के काफिले भी उसके साथ साथ  
चलने लगते है !
ये देख ये अश्कों के नगीने भी 
जैसे एक एक कर बिखरने उनकी 
राह को भिगोने लगते है !
फिर दिल के मलाल भी अनुबंधित 
होकर आक्रोश की तलहटी में 
एकत्रित होने लगते है !
तब भावाग्नि के उच्च ताप से 
पिघलकर शब्द भी जैसे स्वतः  
ही टपकने लगने है ! 
फिर तुम उनका नामांकरण करती 
हो और उसे "गुस्सा" कह कर पुकारती 
हो तब तो जैसे दिल रोने ही लगता है !       

Wednesday, 5 February 2020

एहसास !


एहसास !

एक एहसास 
तुम्हारी अँगुलियों के पोरों में 
एक एहसास 
मेरी साँसों की गति में 
कोई कैसे जुदा करेगा 
एहसास से जुड़े हमदोनों 
के अनुबंधों को 
फिर भी सदा याद रखना 
अनुशाषित करते मेरे 
प्रतिबंधों को
मेरी और तेरी 
प्रीत का मदालस
एहसास काफी है 
ईश द्वारा नवाज़ी हुई 
ये ज़िन्दगी पुरे सकूँ से 
जीने के लिए !   

तेरा मेरा रिश्ता !


तेरा मेरा रिश्ता !

तेरे मेरे रिश्ते को 
सदा ही मैंने रखा है ;
और सभी रिश्तों और 
नातों से ऊपर बहुत ऊपर !
अपनों से परायों से 
रिश्तों से नातों से 
रितो से रिवाज़ों से 
रस्मों से समाजों से !
सच से झूठ से 
वर्तमान से भूत से 
आशा से निराशा से 
सुख से दुःख से !
जीवन से मृत्यु से 
भक्त से भगवान से 
हर एक चीज़ से 
हर एक इंसान से ! 
इतना ऊपर रखा कि
वो रिश्ता आज मेरे ही 
हाथ नहीं आ रहा है !  

Sunday, 2 February 2020

मुखर प्रेम !


मुखर प्रेम !

एक नाम होंठों से 
फिसला और तैरने 
लगा हवा में !
एक स्वप्न आँखों में
छलका और ठहर 
गया भावों में !
ठीक उसी पल में 
मैंने जाना कितना 
मुश्किल है !
प्रेम को अभिव्यक्त 
कर पाना हु-ब-हु यूँ 
शब्दों में !
कितना मुश्किल है 
प्रेम के आगे यूँ मुखर 
हो पाना !
पर अगर दूसरा कोई
विकल्प हो ही नहीं 
जीवन में !
तो कितना आसान 
हो जाता है अभिव्यक्त
करना होकर मुखर 
प्रेम में !    

Saturday, 1 February 2020

तन्हाई का एहसास !


तन्हाई का एहसास !

तेरे आने से पहले 
और 
तेरे जाने के बाद 
और 
तेरे रोने से पहले
और 
तेरे हंसने के बाद 
और 
तेरे दर्दों के पहले 
और 
तेरी खुशियों के 
बाद 
तेरी यादें तेरी ख़ामोशी
और  
तेरे दर्द तेरे आंसूं आकर 
पास 
मेरे मुझे घेर लेते है 
फिर 
मुझे तन्हाई का एहसास 
बिलकुल 
होने ही नहीं देते है !   

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...