Tuesday, 7 August 2018

प्यास का कटोरा



प्यास का कटोरा
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अपने यौवन की 
कुछ बूंदें चुरा  
तुमने उढेल दी
मेरे प्यासे अधरों 
पर और मैंने भी 
उन्हें कुछ पल 
समेटा फिर उतार 
लिया अपने अंतर 
घट में पर ये क्या 
मेरी प्यास का कटोरा 
तो फिर से खाली
हो गया और मैं
एक बार फिर 
अपने हाथ में 
लिए यौवन का
कटोरा तेरे सामने
खड़ा हु एक बार  
फिर से मांगने 
तृप्ति की कुछ बुँदे !

Monday, 6 August 2018

किरदार नहीं निभाया

किरदार नहीं निभाया
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तुम्हारी गुलामी मैंने स्वीकारी
क्यूंकि मेरी ज़िन्दगी और तुम्हारी 
ख़ुशी इसी में थी और इसमें तुम्हारा  
कुछ जाता नहीं दिख रहा था तुम्हे 
बेशक तुम्हारी बेड़ियों ने तुझे पहले 
से ही जकड रखा था मगर   
रूह तो आज़ाद थी तुम्हारी   
और तुम्हारा अपना कुछ 
वक्त भी था आज़ाद लेकिन 
कुछ पीछे छूट रहा था मेरा 
वो वक्त और आगे बढ़ता 
जा रहा था मैं उसके बीच में   
तुम खड़ी थी लेकिन थी स्थिर
गतिहीन और संतुष्ट पुरानी 
उन्ही बेड़ियों में जकड़े अपने 
शरीर को देखते हुए उसी पुराने
अंदाज़ में ज़ाहिर था अपनी 
इस कहानी में तुम्हारे प्रेम ने 
कोई किरदार अभी तक नहीं निभाया 
क्या ये सच में तुम्हारा प्यार है ?
कभी सोचना अकेले में बैठकर !

Sunday, 5 August 2018

मनुहार व इकरार

मनुहार व इकरार
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कविताये समेटती है 
हमारे प्यार व तकरार के पल 
कविताये समेटती है 
पहली मुलाक़ात की ख़ुशी 
व जुदाई का दर्द भी 
कविताये समेटती है 
मोहब्ब्त के रंग और 
अभिव्यक्ति के ढंग भी 
साथ साथ समेटती है 
एक दूजे के द्वारा की 
गयी मनुहार व इकरार भी 
कविताये समेटती है 
कभी करार तो कभी 
इन्कार भी कभी स्वीकार 
तो कभी अंगीकार के पल भी 
कविताये समेटती है 
दिल ए बयान जिसमे 
रंग बदलती स्वांग रचती 
ख्वाब बुनती तो कभी 
चुनती है किरचें भी 
कविता का हर 
सफहा होता है 
दिल का आईना
हर लफ्ज़ होता है 
रूह की फरियाद ! 

Saturday, 4 August 2018

मज़बूर इश्क की निशानियाँ


मज़बूर इश्क की निशानियाँ
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एक तूफ़ान की ही तरह 
आया था तेरा इश्क अपनी 
सारी हदें लांघता हुआ
डुबो डाला था उसने मेरा 
सारा वजूद और मंजूर था 
मुझे खुद को खो देना 
मंजूर था मुझे तेरा नमक
सो लगा लिया मैंने गले उसे 
बनकर समंदर समां लिया 
तुझे बिलकुल अंदर अपने 
मगर अब भी है कुछ मोती 
अटके है मेरी नम पलकों पर 
जो लुढ़क आते है अक्सर 
मेरे गालों तक कि मज़बूर 
इश्क की निशानियाँ इतिहास 
मे कंही सहेजी नहीं जाती हैं 
मगर मैंने तो कसम खायी थी 
इस नाकामी को मिटा कर तुझे 
एक साहसी प्रेमिका बना तेरा
नाम भी इश्क़ के इतिहास में 
दर्ज़ करने की उसी कसम की 
कसम निभा रहा हु अब तक !

Friday, 3 August 2018

तुम्हारा एक बोसा

तुम्हारा एक बोसा
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चेहरे पर पड़ती  
बारिश की बूँदें
मानों एक बोसा
तुम्हारा संग हवा 
के सरसराता छूकर 
निकला हो अभी अभी 
मेरे गालों को और 
उस रेशमी स्पर्श से 
बेवक्त ही खुल जाता है 
पिटारा उन सुकोमल  
तेरी यादों का जिन्हे 
समेटते सहेजते अक्सर  
ही छिले जाते हैं पोर 
मेरी उँगलियों के
बूँदे चाहे बादलों से 
टपकी हों या मन के 
घावों से रिसी हों
वो अपने पास रखती हैं 
चाभी चोरो की तरह 
यादों की तिजोरी की
चेहरे पर पड़ती बारिश 
की बूँदें मानो एक  ...!

Thursday, 2 August 2018

एक भीगा सा मन भी होगा वंहा !

एक भीगा सा मन भी होगा वंहा !
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अच्छा ये बताओ तुमने 
नाचते हुए मोर देखे है ?
नहीं ना तो चलो आओ
मैं तुम्हे अपनी आँखों में
दिखाता हु तुम्हारी यादों 
में नाचते हुए मोर चलो  
आओ आकर पास मेरे 
मेरी इन भूरी-भूरी आँखों 
के कोलाहल भरे इस जंगल 
में झांको और देखो इनमे 
उमड़ते हुए दर्द के बादलों को 
वो कैसे लालायित रहते है हमेशा
झमाझम बरसने के लिए जैसे ही
ये बरसने शुरू होंगे तुम्हारी यादों के 
मोर अपने पंख पसारे नाचने लग जायेंगे
फिर बस वंहा मेरे ख्यालों में होगी तुम और 
तुम्हारा ख्याल होगा और होगी चाँद की रात 
और एक भीगे मन के साथ अपनी आँखों से 
करता हुआ झमाझम बरसात मैं भी होऊंगा वंहा !

Wednesday, 1 August 2018

तुम्हारे होंठों के निशाँ

तुम्हारे होंठों के निशाँ
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अक्सर मुझे तुम 
अपने घर के अकेलेपन 
में महसूस होती हो 
मैंने देखे हैं तुम्हारे
होंठों के निशाँ अपने 
कॉफी प्याली पर और 
कई बार तुम्हारा वो 
पिंक गीला तौलिया
बाथरूम में पडा मुझे 
मुँह चिढाता है तुम्हारी
तरह जीभ निकाल कर 
सुनाई देती हैं मुझे तुम्हारी 
आवाज़ जब दिखती हैं 
तुम्हारी चप्पलें सारे घर में
मटरगश्ती करती हुई 
तुम्हारी महक से पता नहीं 
कैसे महकता रहता हूँ 
मैं दिन और रात आजकल 
यूँ ही मुस्कुराता हूँ मैं बेमतलब,
बेबात बेवज़ह 
बताओगी क्यों होता है ऐसा ? 
क्या तुम्हारे भी साथ ऐसा होता 
है मेरे इंतज़ार में या ये सब 
अद्भुद अकल्पनीय अविश्वनीय 
सिर्फ मेरे साथ घटित होता है !
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उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...