तुम अपनी शिकायतों
का सिलसिला यूँ ही
जारी रखना सदा,
क्यूंकि मैंने देखा है
तुम्हारी शिकायतों
के पीछे छुपी उम्मीदों
को बड़ी आस से मुझे
टुकटुक देखते हुए,
उन्हें देख कर लगता
है कि कुछ शिकायतें
सदा बनी रहनी चाहिए !
उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...
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