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Saturday, 26 August 2017
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उषा का प्रादुर्भाव
उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...
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अक्सर ही मुझे यु लगता है तुम मेरे आस -पास ही हो और मैं तुम्हें पहचान रहा होता हूँ अक्सर होता है ये भ्रम मुझे शीशे के उस पार तु...
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क्या इतना ही काफी नहीं है तुझे प्यार करने के लिए की ? चाहता हूँ, भर दूँ तुम्हारी झोली खुशियों से ना रहे दुःख का एक कण भी ...
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तुम नहीं जानती क्यूँ करता रहा हूँ मैं ऐसा और करता ही रहता हूँ हमेशा , जहाँ भी लगता है तुम्हारा कुछ भी सुराग पहुँच जाता हूँ मैं ...
