सीढ़ियाँ आसमान की चढ़ के
चाँद के एक एक कोने में
मोहब्बत को तलाशते है
और सूरज के सहरा में
दो बूंद पानी की ख़ातिर
मोहब्बत अपनी एड़ियाँ
रगड़ती है
फिर प्रेम के प्यासे
लोग सिसक के अपना
दम तोड़ देते हैं !
शब्दांकन © एस आर वर्मा
उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...
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