Saturday, 16 March 2019

जुदा धड़कने !

जुदा धड़कने !
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वो दोनों इकट्ठे रहते हैं, 
इकट्ठे सोते हैं, 

उनके दुख सुख एक हैं, 
उनकी आँखें एक दूसरे के 
ख़्वाब भी देख लेती हैं; 

वो कहीं भी हों, 
एक दूसरे के नामों से 
जाने जाते हैं; 

उनके घर आने वाले, 
अपनी दस्तक में दोनों 
का नाम शामिल कर लेते हैं; 

दिन के पहले हिस्से में, 
उनकी आँखें एक दूसरे 
को ख़ुश-आमदीद कहती हैं; 

उनकी साँसों की रिदम, 
उनके जिस्म की हरकत से, 
एक दूसरे के होने का इत्मिनान 
दिलाता है; 

वो अक्सर अब,
एक दूसरे की नींद सो लेते हैं, 
लेकिन इन सब के बावजूद; 

अक्सर गहरी रातों में, 
उनके दोनों दिल अपने 
अपने सीनों में अलग अलग 
धड़कते हुए सुनाई देते हैं;  

जबकि वो दोनों 
इकट्ठे रहते हैं, 
इकट्ठे सोते हैं !

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