Friday, 8 February 2019

हैप्पी रोज़ डे !


हैप्पी रोज़ डे ! 
•••••••••••••••
आज "रोज़ डे " है, 
तो मेरे दिल ने मुझ 
से बड़े ही अदब से 
फरमाइश की है;

क्यों ना आज फिर 
से तुम्हें गुलाब की 
तरह गुलाबी होते 
देखा जाए;

ठीक वैसे ही जैसे 
पहली बार मेरी ही 
अंगुलियों का स्पर्श
पाकर तुम्हारी देह 
के सारे रोम रोम खड़े 
हो गए थे;

और चेहरे से गुलाबी 
आभा झरने लगी थी 
तो चाहा आज फिर से 
एक बार गुलाब की 
गुलाबी को पा लू;

मैं अगर तुम्हारा गुलाब 
हूँ तो तुम उस गुलाब की 
गुलाबी आभा हो;
   
तो चलो इसी बहाने 
इस "रोज डे " पर 
अपनी गुलाबी आभा 
अपने गुलाब झार दो
ना तुम ! 

No comments:

उषा का प्रादुर्भाव

  उषा का प्रादुर्भाव आगमन का विषय नहीं, आविर्भाव का आलोक है— वह कहीं से चलकर नहीं आती, अंतरिक्ष की अंतरसलिला से सहसा प्रस्फुटित होती है। ...