Friday, 7 December 2018

तुम्हारा नाम "हम्म"!

तुम्हारा नाम "हम्म"!
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मेरे प्रेम ने तो उस 
पहले ही दिन मुझे 
विवश कर दिया था;

तुम्हे वो सब कह देने 
जिसे कहने में अक्सर 
एक प्रेमी को लग जाते है;

कई घंटे दिन महीनो और 
कई बार तो सालों भी पर   
मैं उस प्रेम की उफनती नदी   
में कुछ इस कदर बहा की;

उस पहले ही दिन मैं 
नहीं रह पाया तुम्हे ये 
कहे बगैर की मैं तुम्हे 
बेइंतेहा मोहब्बत करता हु;

तब सर से पांव तक विस्मृत 
तुम मुझे देखती ही रह गयी थी 
पर तुम्हारे दिल ने भी मेरे दिल 
की इस इल्तिज़ा को स्वीकार लिया था;

तभी तो तुम कुछ देर 
निरुत्तर सी नज़रें नीची 
कर सिर्फ इतना कह पायी थी "हम्म';

ठीक उसी पल मैंने 
तुम्हारा नाम "हम्म"
रख दिया था ! 

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