Thursday, 6 December 2018

रहेगा वही जो अदृश्य है!

रहेगा वही जो अदृश्य है!   
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कुछ लफ्ज़ है जो 
सने नहीं है मेरे 
मेरे ज़ज़्बात की 
स्याही में अभी;

कुछ भाव भी है जो   
अब तक गर्भ में भी 
आये नहीं है अभी;
   
कुछ सपने है जो 
पहुंचे नहीं है मेरी 
आँखों में अभी;
  
कुछ प्रेम कथाएँ 
भी है जिनकी नीव 
रखी नहीं गयी है अभी;

कुछ रंग भी है जो 
फूलों में भी डले 
नहीं है अभी; 

कुछ किरणें है जो  
सूरज की वो नहीं 
पहुँचीं धरती पर अभी;

कुछ नाम है जो 
दर्ज़ नहीं हुए है 
इतिहास में अभी;

पर सुनो ये भी 
संभव है की रह 
जाए यंहा सिर्फ 
वही जो अदृश्य है अभी !

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