Friday, 23 November 2018

प्रेम होता है अलौकिक !



प्रेम होता है अलौकिक ! ••••••••••••••••••••••••• कैसे लौकिक इंसान का लौकिक प्रेम भी अलौकिक हो जाता है; वो सारे सितारे जो इतनी दूर आसमां की गोद में टिमटिमाते हुए भी; गवाह बन जाते है, उन प्रेमी जोड़ियों के जो सितारों के इतने दूरस्थ होने के बावजूद भी; उनकी उपस्थिति को अपने इतनी निकट स्वीकारते है की; अपनी हर बात को एक दूजे के कान में फुसफुसाते हुए कहते है; वो सितारे जो आसमां की गोद में अक्सर ही टिमटिमाते रहते है; वो ही इन प्रेमी जोड़ों के प्रेम के अलौकिक गवाह बन जाते है; इस लोक के प्रेम को अलौकिक प्रेम का  दर्जा दिलाने के लिए ! 

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