Thursday, 15 November 2018

सच कहा था तुमने !

सच कहा था तुमने !
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सच कहा था तुमने 
शब्द बोलते है मेरे,

लेकिन क्या पता है 
तुम्हे कब बोलते है 
वो शब्द मेरे;

सुनो वो बोलते है 
जब तुम उन्हें अपने
कंठ लगाती हो;

तुम्हारे कंठ लगकर 
शब्द मेरे जैसे मुखर 
हो उठते है;

जब तुम उन्हें प्यार
से सहला देती हो तो
सुप्तावस्था से जागृत
हो उठते है वो;

और पाकर तुम्हारा 
स्पर्श सारा खुमार 
उतर जाता है उनका;

और फिर वो शब्द 
मेरे जी उठते है लगकर
कंठ तुम्हारे;

और फिर भावो में 
डूबकर तुम्हारे वो 
शब्द उत्सुक हो उठते
है अपना जीवन जीने को;

सच कहा था तुमने 
शब्द बोलते है मेरे !

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