Wednesday, 31 October 2018

प्रेम के सफर का साथी !

प्रेम के सफर का साथी ! 
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जब हो जाये किसी को
प्रेम अपने ही प्रतिबिम्ब 
से डरने वाले से;

तो दर्द खुद-बा-खुद उस 
प्रेम के सफर का हमसफ़र
बन जाता है;

जब हो जाये किसी को
प्रेम अपनी ही सांसों की  
तेज़ गति से डरने वाले से;

तो दर्द खुद-बा-खुद उस 
प्रेम के सफर का हमसफ़र
बन जाता है;

जब हो जाये किसी को
प्रेम अपनी ही पदचाप  
की आवाज़ से डरने वाले से;

तो दर्द खुद-बा-खुद उस 
प्रेम के सफर का हमसफ़र
बन जाता है;

जब हो जाये किसी को
प्रेम अपनी ही पदचाप  
की आवाज़ से डरने वाले से;

तो दर्द खुद-बा-खुद उस 
प्रेम के सफर का हमसफ़र
बन जाता है;

जब हो जाये किसी को
प्रेम अपने ही घर की 
दहलीज़ को पार करने 
से डरने वाले से;

तो दर्द खुद-बा-खुद उस 
प्रेम के सफर का हमसफ़र
बन जाता है;

और जब दर्द किसी प्रेम 
के सफर का हमसफ़र हो 
बन जाता है;

तो आँसुओं को देनी पड़
जाती है इज़ाज़त आँखों 
के काजल को बहा ले 
जाने की !

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